छत्तीसगढ़ का बालोद जिला अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ लोकल खानपान के लिए भी खास पहचान रखता है. यहां के छोटे-छोटे नाश्ता ठेले लोगों के स्वाद और परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं. ऐसा ही एक मशहूर ठेला बालोद शहर में वर्षों से लोगों के स्वाद का केंद्र बना हुआ है. देवांगन मुंगेड़ी बड़ा नाम से प्रसिद्ध यह नाश्ता ठेला खास तौर पर अपने गरमा-गरम मिर्ची भजिया के लिए जाना जाता है. दुकान संचालक विक्की देवांगन बताते हैं कि उनका परिवार पिछले करीब 35 वर्षों से यह ठेला चला रहा है. यहां मुंगेड़ी, बड़ा, आलू गुंडा और मिर्ची भजिया जैसे पारंपरिक नाश्ते मिलते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग मिर्ची भजिया की रहती है. हालात यह है कि रोजाना लगभग 300 प्लेट मिर्ची भजिया की बिक्री हो जाती है. एक प्लेट की कीमत 20 रुपये रखी गई है, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से इसका स्वाद ले सकें.
मिर्ची भजिया की लोकप्रियता
विक्की देवांगन बताते हैं कि उनके यहां सिर्फ बालोद शहर के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग खास तौर पर मिर्ची भजिया खाने पहुंचते हैं. शाम होते ही ठेले के आसपास लोगों की भीड़ लगने लगती है. कई ग्राहक ऐसे हैं जो वर्षों से यहां आ रहे हैं और इस स्वाद के दीवाने बने हुए हैं. मिर्ची भजिया की लोकप्रियता के पीछे उसकी खास रेसिपी भी बड़ी वजह है. विक्की बताते हैं कि बनाने का तरीका सामान्य दिखाई देता है, लेकिन इसका असली स्वाद उनके ‘सीक्रेट मसाले’ में छिपा है. सबसे पहले मोटी आचारी मिर्ची को बीच से चीरा लगाया जाता है. इसके बाद उसमें घर पर तैयार किया गया खास मसाला भरा जाता है. फिर मिर्ची को बेसन के घोल में डुबोकर गर्म तेल में तला जाता है.
विक्की देवांगन बताते हैं कि उनके यहां सिर्फ बालोद शहर के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग खास तौर पर मिर्ची भजिया खाने पहुंचते हैं. शाम होते ही ठेले के आसपास लोगों की भीड़ लगने लगती है. कई ग्राहक ऐसे हैं जो वर्षों से यहां आ रहे हैं और इस स्वाद के दीवाने बने हुए हैं. मिर्ची भजिया की लोकप्रियता के पीछे उसकी खास रेसिपी भी बड़ी वजह है. विक्की बताते हैं कि बनाने का तरीका सामान्य दिखाई देता है, लेकिन इसका असली स्वाद उनके ‘सीक्रेट मसाले’ में छिपा है. सबसे पहले मोटी आचारी मिर्ची को बीच से चीरा लगाया जाता है. इसके बाद उसमें घर पर तैयार किया गया खास मसाला भरा जाता है. फिर मिर्ची को बेसन के घोल में डुबोकर गर्म तेल में तला जाता है.
वे खास तौर पर मोटी आचारी मिर्ची का इस्तेमाल करते हैं ताकि भजिया ज्यादा तीखा न हो और खाने में सॉफ्ट लगे. मिर्ची भजिया के साथ तीन तरह की चटनियां भी परोसी जाती हैं, जिनमें हरी मिर्च की चटनी, दही और मीठी इमली की चटनी शामिल है. यही कॉम्बिनेशन लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है. स्थानीय मोहम्मद रजा और सुधीर का कहना है कि बालोद के इस ठेले का स्वाद अब शहर की पहचान बन चुका है. बदलते दौर में भी पारंपरिक स्वाद को बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन विक्की देवांगन ने अपने मेहनत और खास रेसिपी से इस स्वाद को वर्षों से लोगों के दिलों तक पहुंचाया है.
