सोशल मीडिया और खबरों में हंता वायरस की चर्चा ने लोगों को 2020 वाले कोविड के दिनों की याद दिला दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या हमें फिर से घरों में बंद होना पड़ेगा? क्या यह वायरस भी हवा से फैलेगा? इन तमाम सवालों का जवाब देते हुए WHO के डायरेक्टर जनरल ने 3 ऐसे मुख्य कारण बताए हैं जो यह साबित करते हैं कि हंता वायरस अगला कोविड नहीं है।
2. सुपर-स्प्रेडिंग की क्षमता (Rate of Infection)
WHO चीफ ने दूसरा बड़ा अंतर इसके फैलने की स्पीड को लेकर बताया है।
कोविड- कोविड की सबसे बड़ी ताकत उसकी सुपर-स्प्रेडिंग क्षमता थी। एक व्यक्ति कुछ ही घंटों में दर्जनों लोगों को संक्रमित कर सकता था।
हंता वायरस- हंता वायरस इतनी आसानी से नहीं फैलता। यह ज्यादातर उन क्लोज-सर्कल (जैसे एक ही घर में रहने वाले या बहुत करीबी लोग) तक ही सीमित रहता है जो सीधे तौर पर संक्रमित गंदगी या मरीज के बहुत पास रहे हों। इसलिए इसके पैंडेमिक यानी वैश्विक महामारी बनने की संभावना बहुत कम है।
मेडिकल तैयारी और इलाज (Treatment and Protocols)
जब कोविड आया था, तब दुनिया उसके लिए तैयार नहीं थी। लेकिन हंता वायरस के साथ ऐसा नहीं है।
प्रोटोकॉल- हंता वायरस के बारे में विज्ञान को काफी समय से पता है। इसके लिए पहले से ही सख्त आइसोलेशन प्रोटोकॉल मौजूद हैं।
निगरानी का समय- हंता वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने का समय) काफी लंबा होता है। इस वजह से डॉक्टरों को मरीज की निगरानी करने और चेन तोड़ने के लिए काफी वक्त मिल जाता है। WHO का कहना है कि अगर हम संदिग्ध मरीजों को 42 दिनों की निगरानी में रख लें, तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
