जांजगीर-चांपा के एसपी विजय कुमार पांडेय ने सामुदायिक पुलिसिंग की मिसाल पेश की है। इसकी गूंज देश की पुलिस अकादमी तक पहुंच गई है।
सबरिया (वल्लभ भाई) समुदाय को अवैध शराब के कारोबार से निकालकर सम्मानजनक रोजगार से जोड़ने वाला “जांजगीर मॉडल” अब सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एनपीए), हैदराबाद में केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है। हाल ही में दिए गए प्रेजेंटेशन के बाद एनपीए ने इसे अपनी लाइब्रेरी और पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। करीब 150 प्रोबेशनर आईपीएस अधिकारी ट्रेनिंग के बाद इसे पढ़ेंगे। शेष|पेज 5
एसपी पांडेय ने इसका कॉपीराइट भी सार्वजनिक कर दिया, ताकि अन्य जिले भी इसे लागू कर सकें। एसपी पांडेय ने जब हैदराबाद अकादमी में प्रजेंटेशन दिया, तो उनकी खूब सराहना हुई। अधिकारियों ने माना कि सामुदायिक पुलिसिंग अक्सर केवल भाषणों तक सीमित रहती है, लेकिन एक विशेष समुदाय की बुनियादी समस्या जड़ से खत्म करना वाकई यूनिक केस है।
जानिए… क्या है जांजगीर का सबरिया बदलाव मॉडल
जिले का सबरिया समुदाय दशकों से अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने की सामाजिक कुरीति में फंसा हुआ था। एसपी पांडेय ने इसे केवल क्राइम के बजाय सोशल प्रॉब्लम के तौर पर देखा।
- संवाद से बदली सोच: पुलिस ने लाठी के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। पुलिस की टीमें गलियों में गईं, उनके साथ बैठीं और उन्हें समझाया कि यह काम उनके बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर रहा है।
- स्वरोजगार का विकल्प: सिर्फ शराब छुड़वाई नहीं, बल्कि आजीविका के साधन भी दिए।
- परिणाम: आज सबरिया समुदाय के हाथों में शराब भट्टी नहीं, बल्कि सम्मानजनक काम है। अपराध के ग्राफ में गिरावट आई और पुलिस के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा।
हमने केवल कानून लागू नहीं किया, बल्कि विश्वास जीता है।सबरिया समुदाय ने यह साबित कर दिया कि अगर सही दिशा मिले, तो कोई भी मुख्यधारा में लौट सकता है। अब देश के नए आईपीएस अफसर इसे पढ़ेंगे, यह जांजगीर के लिए गौरव की बात है।
