छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में ‘अक्ती’ यानी अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इसे प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा तिहार (त्योहार) माना जाता है, जो नई शुरुआत, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। यह पर्व खासतौर पर किसानों के लिए बेहद अहम होता है। अक्ती के दिन किसान खेती-किसानी के कामों की शुरुआत करते हैं। हल (नांगर), बैलों और खेती के औजारों की पूजा की जाती है और अच्छी फसल की कामना की जाती है।
अक्ती को “अबूझ मुहूर्त” भी माना जाता है, यानी इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय गणना के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। शादी-विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
