Paddy Procurement 2026: छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के लिए इस बार मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शासन ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की अवधि 15 दिन कम कर दी है। अब किसानों से 15 नवंबर से 15 जनवरी तक ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाएगा। यानी किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सिर्फ 60 दिन का समय मिलेगा। पिछले साल धान खरीदी 15 नवंबर से 31 जनवरी तक हुई थी।
खरीदी की अवधि कम होने का असर खासकर जांजगीर-चांपा जिले के किसानों पर पड़ सकता है। जिले में बड़ी संख्या में किसान देर से तैयार होने वाली धान की किस्मों की खेती करते हैं। हालांकि, धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर से हो जाएगी, लेकिन यहां मंडियों और खरीदी केंद्रों में धान की आवक दिसंबर से तेज होती है। दिसंबर और जनवरी में ही सबसे ज्यादा धान पहुंचता है। ऐसे में खरीदी के लिए कम समय मिलने से किसानों के सामने निर्धारित समय में अपनी पूरी उपज बेचने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
खरीदी केंद्रों में बढ़ सकती है भीड़
धान खरीदी की समय-सीमा कम होने से खरीदी केंद्रों में भीड़ बढ़ने की आशंका है। यदि इसके साथ खरीदी की लिमिट का पेंच फंसा तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है। किसानों को चिंता है कि कम समय में सभी किसानों का धान खरीद पाना मुश्किल हो सकता है।
पिछले साल 31 जनवरी तक खरीदी होने के बावजूद कई किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए थे। किसानों की मांग के बाद शासन को खरीदी की अवधि कुछ दिन और बढ़ानी पड़ी थी। इसके बावजूद इस साल खरीदी की समय-सीमा पहले से ही 15 दिन कम कर दी गई है।
हालांकि, किसानों के लिए राहत की बात यह है कि पहले से पंजीकृत किसानों को इस बार दोबारा पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। धान खरीदी से संबंधित आदेश जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सहित अन्य संबंधित विभागों तक पहुंच चुका है। अधिकारियों को खरीदी की समय-सीमा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी किसानों को इसकी जानकारी मिल सके।
जिले में 1 लाख 28 हजार 719 किसानों का पंजीयन
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जांजगीर-चांपा जिले में अब तक 1 लाख 28 हजार 719 किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें 4,193 किसान नए हैं, जो पहली बार समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचेंगे। पिछले साल जिले में करीब 1 लाख 26 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था।
इस बार 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। खरीदी केंद्रों के लिए नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। इसके अलावा खरीदी प्रभारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है।
पिछले साल कुछ खरीदी केंद्रों में धान गबन का मामला सामने आया था, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इसी को देखते हुए इस बार कई केंद्रों में खरीदी प्रभारियों को बदलने की तैयारी की जा रही है।
टोकन व्यवस्था में भी किया गया बदलाव
इस बार धान खरीदी के लिए किसानों की जमीन के रकबे के आधार पर टोकन देने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इसके तहत टोकन की संख्या इस प्रकार होगी:
- 2 एकड़ से कम जमीन वाले किसान: एक टोकन मिलेगा। यानी एक ही बार में पूरा धान बेचना होगा।
- 2 से 10 एकड़ जमीन वाले किसान: दो टोकन मिलेंगे। यानी दो बार में धान बेच सकेंगे।
- 10 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसान: तीन टोकन मिलेंगे। यानी तीन बार में अपनी उपज बेच सकेंगे।
ऐसे में इस बार किसानों को कम समय में धान बेचने के साथ-साथ टोकन व्यवस्था का भी ध्यान रखना होगा। खरीदी की अवधि घटने से किसानों को अपनी उपज समय पर बेचने की चिंता सताने लगी है।
