नई दिल्ली। हम में से बहुत से लोग दिनभर चेयर या सोफा पर बैठकर अपना सारा समय बिताते हैं, लेकिन भारतीय घरों में हमेशा से जमीन पर पालथी मारकर बैठने की सदियों से परंपरा रही है। भले ही, आज हम मॉडर्न होने के चक्कर में इस पुराने तरीके को भूलते जा रहे हैं, लेकिन बिगड़ता लाइफस्टाइल हमें आदतें बदलने पर मजबूर कर रहा है। वहीं, जमीन पर बैठना भी सदियों पुरानी आदत नहीं है, इसके पीछे भी एक साइंस है। दरअसल, साइंस भी मानता है कि जमीन पर बैठना शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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जमीन पर पालथी मारकर बैठने के फायदे
जिन लोगों को जमीन पर बैठने की आदत होती है, उन्हें कई तरह के फायदे मिलते हैं जिनके बारे में यहां बताया जा रहा है:
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कोर स्टेबिलिटी
जब हम चेयर पर बैठते हैं तो हमें एक सपोर्ट मिलता है जिससे कोर स्टेबिलिटी कमजोर होती चली जाती है। वहीं, जमीन पर बैठने से कोर अपने आप स्टेबल होती है।
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हिप्स में कम तनाव
आपने गौर किया होगा कि चेयर पर लंबे समय तक बैठे रहने से हिप्स में तनाव बढ़ जाता है, कई बार इसकी वजह से हिप्स में टाइटनेस भी बढ़ जाती है। जब हम जमीन पर बैठते हैं हिप्स पर कम प्रेशर पड़ता है क्योंकि हम अपने हिसाब से पोश्चर बदल सकते हैं।
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ज्यादा मसल एक्टिविटी
इसका एक फायदा यह भी है कि मसल एक्टिविटी ज्यादा होती है। इसमें भी नीलिंग, स्क्वाटिंग एक्टिव रेस्ट पोजिशन मानी जाती हैं।
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मोबिलिटी में सुधार
जमीन पर बैठने से हिप्स, घुटनों और टखनों की रेंज ऑफ मोशन में सुधार होता है। इससे शरीर का पोश्चर अलाइन रहता है। इससे मोबिलिटी के साथ शरीर का बैलेंस अच्छा बना रहता है।
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लचीलापान बढ़ाए
बैठे-बैठे की ऐसे योगासन और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज की जा सकती हैं जो शरीर का लचीलापन बढ़ाएं। इनमें बटरफ्लाई स्ट्रेच, सीटेड फॉरवर्ड फोल्ड और स्पाइनल ट्विस्ट शामिल हैं।
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किस बात का रखें ध्यान?
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खराब पोश्चर में नीचे बैठने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कमर या गर्दन में दर्द की शिकायत हो सकती है।
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घुटनों से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी वाले लोगों को जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। दरअसल, जमीन पर पालथी मारकर बैठने से सारा प्रेशर ज्वाइंट्स में आ जाता है।
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ज्यादा देर तक जमीन पर नहीं बैठना चाहिए, इससे ब्लड सर्कुलेशन भी कम होता है।
