नई दिल्ली : मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, बुखार और शरीर में दर्द जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। हालांकि, हर बार इन लक्षणों को केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। खासकर अगर अचानक तेज बुखार के साथ शरीर में ज्यादा दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, अत्यधिक कमजोरी या भूख कम लगने जैसी समस्याएं हों, तो ये डेंगू के लक्षण भी हो सकते हैं।
हालांकि, ऐसे लक्षण कई अन्य वायरल संक्रमणों में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
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कब डॉक्टर से लें सलाह?
अगर बुखार दो से तीन दिनों से अधिक समय तक बना रहे या लगातार लक्षण बढ़ रहे हों, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सक जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। डेंगू की जांच के लिए बीमारी के शुरुआती दिनों में NS1 एंटीजन टेस्ट, जबकि बाद के चरण में एंटीबॉडी टेस्ट किया जा सकता है। मरीज की प्लेटलेट्स और शरीर में पानी की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है।
डेंगू में पानी की कमी से बचना जरूरी
डेंगू की स्थिति में पर्याप्त आराम करने के साथ शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। पानी के अलावा ORS, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं, ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।
बुखार कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं बिना चिकित्सकीय सलाह के एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या अन्य दर्द निवारक दवाएं नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि डेंगू की स्थिति में इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर नाक या मसूड़ों से खून आना, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, ज्यादा नींद आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
डेंगू में बुखार कम होने के बाद भी सावधानी बरतना जरूरी है। कुछ मरीजों में इसी दौरान गंभीर जटिलताएं सामने आ सकती हैं। इसलिए बदलते मौसम में तेज बुखार और शरीर में ज्यादा दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर जांच कराना जरूरी है।
