Brain Aneurysm: सितंबर महीने को ब्रेन एन्यूरिज्म जागरूकता माह के तौर पर मनाया जाता है। ब्रेन एन्यूरिज्म ऐसी स्थिति है, जिसके बारे में आम लोगों में जानकारी काफी कम है। खास बात यह है कि यह समस्या केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी हो सकती है। कई मामलों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और यह लंबे समय तक बिना बदलाव के रह सकता है।
ब्रेन एन्यूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब दिमाग तक रक्त पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका की दीवार का कमजोर हिस्सा फूलकर गुब्बारे जैसा बन जाता है। अगर यह एन्यूरिज्म फट जाए तो दिमाग के आसपास रक्तस्राव हो सकता है, जिसे सबरैक्नॉइड हेमरेज कहा जाता है। ऐसी स्थिति गंभीर और जानलेवा आपातस्थिति बन सकती है।
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अचानक बेहद तेज सिरदर्द हो सकता है प्रमुख संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन एन्यूरिज्म फटने पर अचानक बहुत तेज सिरदर्द हो सकता है। यह सिरदर्द कुछ सेकंड या मिनटों में अपनी चरम तीव्रता तक पहुंच सकता है। इसके साथ उल्टी, गर्दन में अकड़न, बेहोशी, दौरे, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में दिक्कत या भ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
कुछ मामलों में एन्यूरिज्म के फटने से पहले भी संकेत दिखाई दे सकते हैं। जब एन्यूरिज्म आकार में बड़ा होने लगता है और आसपास की नसों पर दबाव डालता है, तो आंख के आसपास लगातार दर्द, दोहरा दिखाई देना, पलक का झुकना या आंखों की रोशनी और गतिविधियों में अचानक बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इन लक्षणों को कई बार माइग्रेन, आंखों की थकान या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से जोड़ दिया जाता है। हालांकि, अचानक या असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण सामने आने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
उम्र के अलावा ये कारण भी बढ़ा सकते हैं जोखिम
ब्रेन एन्यूरिज्म के खतरे को केवल उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। परिवार में किसी करीबी सदस्य को ब्रेन एन्यूरिज्म होने का इतिहास, कुछ आनुवंशिक बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर और तंबाकू का सेवन इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
जिन लोगों के परिवार में ब्रेन एन्यूरिज्म का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। युवाओं के लिए भी ब्लड प्रेशर की नियमित जांच, शारीरिक गतिविधि बनाए रखना और तंबाकू से दूरी रखना महत्वपूर्ण है।
सीटी और एमआर एंजियोग्राफी से हो सकती है जांच
ब्रेन एन्यूरिज्म की आशंका होने पर डॉक्टर सीटी एंजियोग्राफी या एमआर एंजियोग्राफी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में एन्यूरिज्म की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने के लिए डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी यानी डीएसए की जरूरत पड़ सकती है।
अगर एन्यूरिज्म की पुष्टि होती है तो उसके आकार, स्थान और बनावट के साथ मरीज की उम्र, पारिवारिक इतिहास और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखकर उपचार तय किया जाता है।
कुछ मामलों में एन्यूरिज्म की नियमित इमेजिंग के जरिए निगरानी की जाती है, जबकि फटने या दोबारा रक्तस्राव के जोखिम को कम करने के लिए उपचार की जरूरत पड़ सकती है। स्थिति के अनुसार एंडोवैस्कुलर उपचार या सर्जिकल क्लिपिंग जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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हर सिरदर्द में ब्रेन स्कैन जरूरी नहीं
ब्रेन एन्यूरिज्म को लेकर जागरूकता का मतलब यह नहीं है कि हर सिरदर्द में ब्रेन स्कैन कराया जाए। सामान्य सिरदर्द और गंभीर चेतावनी संकेतों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
युवाओं में ब्रेन एन्यूरिज्म अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन केवल उम्र के आधार पर इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। खासकर अचानक शुरू हुआ बेहद तेज सिरदर्द या इसके साथ बेहोशी, कमजोरी, बोलने या देखने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
