राजधानी रायपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों में सरकारी यानी नजूल की जमीनों को दान पत्र देकर बेचने का बड़ा खेल सामने आ रहा है। इसका खुलासा सुशासन तिहार के तहत लगाए जा रहे शिविरों में मिल रही शिकायतों से हो रहा है। पिछले दिनों राजधानी रायपुर में ही आयोजित सुशासन शिविर में करीब पांच आवेदन आए थे, जिस पर कहा गया है कि संतोषी नगर, मठपुरैना, कुशालपुर, चंगोराभाठा सहित अन्य इलाकों में शासन द्वारा आवंटित पट्टे की जमीन को दान-पत्र के जरिए लाखों रुपए में बेचा जा रहा है। यहीं नहीं, इस तरह की शिकायतें सिर्फ राजधानी रायपुर के अलावा अन्य प्रमुख शहरों बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा, धमतरी, महासमुंद सहित अन्य शहरों में आयोजित सुशासन शिविर में आ रही है।
भू-माफिया भी सक्रिय
सूत्रों के अनुसार तालाब, चारागाह और सरकारी पट्टे की जमीनों को कब्जाने और बेचने के इस नेटवर्क में भू-माफिया भी सक्रिय हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर और राजस्व रेकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी संपत्तियों को निजी भूमि की तरह दर्शाया जा रहा है। इसके बाद इन्हें भोले-भाले लोगों को बेच दिया जाता है
