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    छत्तीसगढ़

    वेदांता बालको की पहल से ग्रामीणों को मिला आत्मनिर्भरता का रास्ता

    News Lead18By News Lead18April 30, 2026
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    रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है, जहाँ कृषि, विशेष रूप से धान की खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, राज्य में खरीफ के मौसम के दौरान लगभग 80-85% कृषि भूमि पर धान की खेती की जाती है। हालांकि, सिंचाई की सीमित सुविधाओं और वर्षा पर निर्भरता के कारण किसानों की आय अक्सर एक ही फसल चक्र तक सीमित रह जाती है, जिससे वे मौसम के उतार-चढ़ाव, बढ़ती लागत और सीमित विकल्पों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।

    इसी पृष्ठभूमि में, वेदांता बालको द्वारा छत्तीसगढ़ के कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा जिलों के 123 गाँवों में एक समग्र आजीविका मॉडल विकसित किया जा रहा है, जो केवल कृषि पर निर्भरता को कम करते हुए आय के कई स्रोत तैयार करने पर केंद्रित है। इन पहलों से अब तक 2 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है।

    इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें कृषि, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, सूक्ष्म उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढांचे को एक साथ जोड़कर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण आजीविका को अधिक स्थिर, टिकाऊ और लचीला बनाता है।

    महिलाएं बन रहीं आर्थिक सशक्तिकरण की अग्रदूत इस परिवर्तन के केंद्र में ग्रामीण महिलाएं हैं, जो अब केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार की मुख्य आय अर्जक के रूप में उभर रही हैं। वेदांता बालको के ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत अब तक 561 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सशक्त किया गया है, जिनसे 6,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

    ‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों और वित्तीय साक्षरता, बचत एवं ऋण प्रबंधन जैसे प्रशिक्षणों से सुसज्जित ये समूह अब साधारण बचत इकाइयों से आगे बढ़कर मजबूत आजीविका नेटवर्क में परिवर्तित हो चुके हैं।

    • 600 से अधिक महिलाएं विभिन्न छोटे व्यवसायों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं
    • 45 से अधिक गांवों में 2,200+ महिलाएं नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और अन्य आय- सृजन गतिविधियों में सक्रिय हैं

    कोरबा जिले की विजय लक्ष्मी सारथी इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं। व्यक्तिगत और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर घर से फूड बिजनेस शुरू किया और आज ₹12,000 से ₹15,000 प्रति माह कमा रही हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय की आर्थिक मजबूती का आधार भी बनती हैं।

    इसी तरह, ‘क्लीनला’ जैसे महिला-नेतृत्व वाले समूह उद्यमों में आठ महिलाओं का समूह घरेलू सफाई उत्पादों का निर्माण कर रहा है और प्रत्येक सदस्य लगभग ₹6,000 मासिक आय अर्जित कर रही है, जो सामूहिक उद्यमिता की शक्ति को दर्शाता है।
    कृषि के साथ कौशल आधारित आय का सशक्त विस्तार जहाँ कृषि अभी भी ग्रामीण आय का आधार बनी हुई है, वहीं आय के विविधीकरण का सबसे बड़ा बदलाव गैर- कृषि क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में स्थापित वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से अब तक 15,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

    हर वर्ष 1,000 से अधिक युवाओं को उद्योग की मांग के अनुरूप विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जा रहा है।

    • 11 राज्यों में फैले 70 से अधिक संस्थानों में प्लेसमेंट
    • वार्षिक वेतन ₹3 लाख तक

    कोरबा के पोड़ीबहार निवासी आर्यन दास महंत की कहानी इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने स्किल ट्रेनिंग प्राप्त की और आज होटल इंडस्ट्री में कार्यरत हैं, जहाँ वे लगभग ₹2 लाख वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं।

    यह परिवर्तन ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहाँ आय अब केवल कृषि पर निर्भर नहीं रहकर औपचारिक रोजगार और स्थायी आय के स्रोतों से भी जुड़ रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से मजबूत हो रहा आजीविका तंत्र वेदांता बालको के प्रयास केवल आय-सृजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन बुनियादी तत्वों को भी मजबूत कर रहे हैं, जो दीर्घकालिक आजीविका के लिए आवश्यक हैं।

    • 110 ‘नंद घर’ केंद्रों के माध्यम से 7,000 से अधिक माताओं और बच्चों तक पहुंच
    • कोरबा और कवर्धा में कोचिंग केंद्रों के जरिए 300+ छात्रों को प्रशिक्षण, अब तक 84 चयन
    • 4,000 से अधिक छात्रों को शैक्षणिक सहायता

    स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सुधार से लोगों की कार्यक्षमता में वृद्धि हो रही है और अचानक आने वाली आर्थिक चुनौतियों का प्रभाव कम हो रहा है। सड़कों, सामुदायिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं में सुधार से लोगों के लिए बाजार, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हुई है, जो आजीविका के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    एकल निर्भरता से बहु-स्रोत आय की ओर बढ़ता ग्रामीण समाज

    इन समग्र प्रयासों के परिणामस्वरूप अब ग्रामीण परिवार केवल एक ही आय स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ-साथ छोटे व्यवसाय, कौशल आधारित रोजगार और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आय के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।वेदांता बालको का यह मॉडल खेती का विकल्प प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि उसे सशक्त बनाते हुए अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संतुलन आता है और परिवारों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है।

    सुरक्षित, स्थायी और भविष्य के लिए तैयार आजीविका की दिशा में कदम

    छत्तीसगढ़ के इन क्षेत्रों में हो रहा यह बदलाव केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे भविष्य की ओर संकेत करता है, जहाँ आजीविका अधिक स्थिर, लचीली और सुरक्षित होगी। वेदांता बालको के प्रयास यह दर्शाते हैं कि यदि कृषि, कौशल, शिक्षा और सामुदायिक विकास को एकीकृत रूप से लागू किया जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हुए दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन संभव है।

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