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    बंदूकें थमीं पर जमीन में दबे आइईडी से अब भी जंग, साल 2001 से 2026 तक आइईडी ब्लास्ट की 1,277 घटनाएं हुई हैं दर्ज

    News Lead18By News Lead18March 29, 2026
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    रायपुर। माओवाद के पूर्ण सफाए के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब बेहद करीब है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बल ने माओवादियों को उनके सबसे सुरक्षित किलों से खदेड़ दिया है, लेकिन इस निर्णायक मोड़ पर एक अदृश्य दुश्मन सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है,वह है आइईडी।

    बंदूकें तो शांत हो रही हैं, लेकिन जमीन के नीचे बिछा बारूद आज भी सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के लिए पाताल जाल बना हुआ है।

    बस्तर की माटी को पूरी तरह सुरक्षित बनाना लंबी प्रक्रिया

    माओवादी खात्मे के अभियान से जुड़े पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माओवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन बस्तर की माटी को पूरी तरह सुरक्षित बनाना एक लंबी प्रक्रिया होगी। जब तक जमीन के नीचे दबे बारूद का आखिरी टुकड़ा निष्क्रिय नहीं हो जाता, तब तक विकास पूरी रफ्तार से नहीं दौड़ पाएगी।

    2001 से 2026 तक आइईडी ब्लास्ट की 1,277 घटनाएं

    बस्तर के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2001 से 2026 तक आइईडी ब्लास्ट की 1,277 घटनाएं दर्ज की गईं। इस घातक हथियार ने न केवल 443 जवानों की जान ली, बल्कि 158 आम नागरिकों को भी अपनी चपेट में लिया। साल 2010 इतिहास का सबसे काला वर्ष रहा, जब आइईडी ने अकेले 101 सुरक्षा बल के जवानों की बलि ली थी।

    राहत की बात यह है कि साल 2026 में अब तक आइईडी से एक भी शहादत नहीं हुई है, जो सुरक्षा बलों की चौकसी और नई रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

    अब खोजबीन ही है सबसे बड़ा हथियार

    माओवाद मुक्त बस्तर की राह में सबसे बड़ा रोड़ा यही आइईडी रहा है, लेकिन अब सुरक्षा बलों ने अपनी कार्यप्रणाली बदल दी है। अब फोर्स केवल हमला नहीं करती, बल्कि तकनीक और खोजी कुत्तों के जरिए खोजो और निष्क्रिय करो के अभियान पर काम कर रही है।

    पिछले 26 वर्षों में कुल 4580 आइईडी जब्त किए गए हैं, जिसमें से साल 2025 की बरामदगी ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है।

    ओडीएफ की तर्ज पर आइईडी मुक्त गांव

    प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि असली जीत केवल बंदूकें शांत करने में नहीं, बल्कि जमीन को सुरक्षित करने में है। उन्होंने घोषणा की है कि जिस तरह गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाया गया था, उसी तर्ज पर अब बस्तर के हर संदेहास्पद रास्ते और पगडंडी को आइईडी मुक्त घोषित करने का अभियान चलाया जाएगा।

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