नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल पिछले कुछ वक्त में तेजी से बढ़ा है। इसी के साथ टेक दिग्गज कंपनियां भी अपने AI मॉडल को पहले से ज्यादा स्मार्ट बनाने में लगी हैं। इसके लिए वे यूजर्स के अलग-अलग तरह के डेटा का यूज कर रही हैं। अब AI चैटबॉट सिर्फ आपकी सर्च हिस्ट्री ही नहीं, बल्कि चैट, अपलोड की गई फाइलें, फोटो, वॉइस इनपुट और एप्स के साथ आपकी एक्टिविटीज भी AI ट्रेनिंग का हिस्सा बन रही हैं।
हालांकि अलग-अलग कंपनियों की डेटा पॉलिसी और यूजर्स को मिलने वाले कंट्रोल अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इन AI चैटबॉट का इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है।
Google और Meta ने किए कुछ बदलाव
गूगल ने कुछ वक्त पहले Search History से जुड़े कुछ बदलाव किए हैं, जिनके तहत सर्च एक्टिविटीज को मैनेज पहले से अलग तरीके से किया जा रहा है। जबकि Meta भी Facebook, Instagram और Meta AI के जरिए मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल अपने AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कर रहा है।
इतना ही नहीं Microsoft Copilot, ChatGPT, Claude और Grok जैसे AI प्लेटफॉर्म भी यूजर्स के साथ हुई चैट्स या शेयर किए गए कंटेंट का लिमिटेड या तय शर्तों के तहत इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अगर आप इन AI चाटबोट्स के साथ आधार और बैंक डिटेल्स जैसी चीजें शेयर करते हैं तो आप किसी दिन बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं।
मिलते हैं प्राइवेसी कंट्रोल ऑप्शन भी
हालांकि कंपनियां ये भी कहती हैं कि यूजर्स को अपनी प्राइवेसी पर कंट्रोल देने के लिए कई तरह के ऑप्शन भी उपलब्ध कराए गए हैं। उदाहरण के लिए ChatGPT में Chat History & Training को ऑफ करने का ऑप्शन मिलता है। इससे नई चैट AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए यूज नहीं की जाती।
दूसरी तरफ गूगल अकाउंट में Web & App Activity और Search History जैसी सेटिंग्स के जरिए डेटा कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा Meta भी AI और प्राइवेसी से जुड़ी सेटिंग्स ऑफर करता है, जबकि Microsoft Copilot और अन्य सर्विस में भी डेटा मैनेजमेंट के ऑप्शन दिए गए हैं।
