रायपुर : छत्तीसगढ़ में किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था में जल्द बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री टोकन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना, जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना तथा किसानों को निर्धारित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने उर्वरकों की बिक्री, वितरण और मूल्य नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल तैयार किया है। इसके तहत खाद की बिक्री मुख्य रूप से पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों के जरिए होगी। किसानों की पहचान के लिए आधार या अन्य मान्य पहचान पत्र के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इससे बिक्री का रिकॉर्ड रखने और खाद वितरण की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
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दुकानों के बाहर बताना होगा खाद का स्टॉक और कीमत
नई व्यवस्था के तहत खाद विक्रेताओं को अपनी दुकानों के बाहर उपलब्ध उर्वरकों के स्टॉक और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
इसके अलावा, खाद की मांग और उपलब्धता पर नजर रखने के लिए इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) पोर्टल को मजबूत किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्यों और जिलों में उर्वरकों के स्टॉक तथा मांग की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी। यूरिया जैसे कृषि उपयोग के उर्वरकों का गैर-कृषि कार्यों और उद्योगों में अवैध इस्तेमाल रोकने के लिए भी निगरानी व्यवस्था सख्त की जाएगी।
यूरिया, DAP और NPK के संतुलित उपयोग पर जोर
नई व्यवस्था के तहत किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यूरिया, डीएपी और एनपीके के संतुलित उपयोग के साथ जैव उर्वरकों तथा नैनो यूरिया को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक खाद के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। नई प्रणाली लागू होने के बाद खाद की बिक्री और वितरण प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, टोकन व्यवस्था लागू होने की तारीख और इसके संचालन से जुड़ी विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी संबंधित विभाग की ओर से जारी किए जाने के बाद स्पष्ट होगी।
