कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित बीनागुड़ा गांव में एक लकवाग्रस्त मरीज को एंबुलेंस नहीं मिली। इसके बाद गांव के 20 ग्रामीणों ने मरीज को खटिया पर लादकर 19 किलोमीटर पैदल सफर तय किया। उसे चिलचिलाती धूप में छोटेबेठिया बीएसएफ कैंप तक पहुंचाया गया, जहां से एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भेजा गया।
यह घटना कांकेर जिले के पखांजूर के अंदरूनी गांव से सामने आई है। लकवाग्रस्त युवक मर्रो पददा को अस्पताल ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस को फोन किया गया था। परिजनों ने सुबह 7 बजे से लगातार फोन किया, लेकिन एंबुलेंस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। तीन दिन पहले अचानक युवक को लकवा मार गया था। गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क दोनों ही नदारद हैं। इलाके में 108 एंबुलेंस सेवा अक्सर ठप रहती है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने मरीज की जान बचाने के लिए यह जोखिम भरा कदम उठाया। उन्होंने पहाड़ और पथरीले रास्तों से होते हुए मरीज को अस्पताल तक पहुंचाया।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
बीनागुड़ा गांव में आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। सड़कें न होने के कारण आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं। 108 एंबुलेंस सेवा की लगातार अनुपलब्धता एक गंभीर समस्या है। यह घटना आधुनिक युग में भी स्वास्थ्य प्रणाली पर सीधा सवाल उठाती है। सरकार और प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का मानवीय प्रयास
एंबुलेंस न मिलने पर गांव के 20 लोग मरीज के लिए भगवान बन गए। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 19 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया। चिलचिलाती धूप और कठिन रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। छोटेबेठिया बीएसएफ कैंप से मिली मदद ने मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया। यह ग्रामीणों की एकजुटता और मानवीय संवेदना का एक बड़ा उदाहरण है।
