रायपुर। बजट सत्र में पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंर्त्य विधेयक- 2026 पर राज्यपाल रमेन डेका ने मोहर लगा दी है।ऐसे में राज्य में नए कानून अब लागू हो गया है। अब मतांतरण से पहले प्राधिकृत अधिकारी के पास आवेदन करना होगा।
इसकी जानकारी वेबसाइट, ग्राम पंचायत व संबंधित थाने में प्रदर्शित की जाएगी। 30 दिनों के भीतर दावा आपत्ति व जांच की प्रक्रिया होगी। गवाहों से पूछताछ, शपथ पत्र व अन्य जानकारी के बाद आवेदन वैध घोषित किया जाएगा।
वैध आवेदन के निर्धारित तिथि से 90 दिनों के भीतर मतांतरण नहीं होने पर प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। दो या दो से अधिक व्यक्ति द्वारा या अवैध सामूहिक मतांतरण कराने पर आजीवन करावास का प्रविधान है।
अंतर धार्मिक विवाह कराने वाले धर्मगुरु (फादर, प्रीस्ट, मौलवी आदि) को विवाह से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणा पत्र देना होगा।
विधयेक में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में अवैध मतांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रविधान रखा गया है।
बजट सत्र में विगत 19 मार्च को विधानसभा में गृहमंत्री विजय शर्मा ने विधेयक पेश किया था, जो ध्वनित मत से पारित हुआ था। मुख्यमंत्री बनने के बाद विष्णु देव साय ने ऐलान किया था कि जबरन मतांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून लाया जाएगा।
नितिन नवीन को दिया ‘धर्म स्वातंर्त्य विधेयक’ विशेषांक
मुख्यमंत्री ने दिल्ली प्रवास के दौरान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ भाजपा का मुखपत्र ‘दीप कमल’ के विशेषांकों की प्रति भेंट की।
प्रकाशित विशेषांकों में एक ‘धर्म स्वातंर्त्य विधेयक’ पर और दूसरा अंक ‘माओवादी हिंसा उन्मूलन’ पर केंद्रित है। इस दौरान पत्रिका दीप कमल के संपादक पंकज झा भी उपस्थित रहे।
