छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम चरण में कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 को मंजूरी मिल गई। इस विधेयक पर सदन में विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी बात रखी। बहस के दौरान भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, एकरूपता और समयबद्धता जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। अंततः चर्चा के बाद विधेयक पारित कर दिया गया और इसके साथ ही विधानसभा सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गया।
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन के सभी सदस्यों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्य की भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सदन की कार्यवाही के अंत में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।
भर्ती व्यवस्था पर केंद्रित रही सदन की चर्चा
कर्मचारी चयन मंडल विधेयक को लेकर सदन में लंबी चर्चा हुई। इस दौरान विपक्ष ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तविक एकरूपता लाने के लिए अभी और सुधार की जरूरत है। विपक्ष का मानना था कि केवल विधेयक लाने भर से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इसके प्रावधानों को व्यवहारिक और मजबूत बनाना भी जरूरी है।
वहीं सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को युवाओं और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है, ताकि भविष्य में चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद और अनिश्चितता कम हो सके।
सीएम साय ने गिनाईं सरकार की प्राथमिकताएं
विधेयक पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार भर्ती व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि राज्य में बीते दो वर्षों के दौरान 32 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। साथ ही यह भी कहा गया कि आने वाले समय में परीक्षाओं के लिए कैलेंडर जारी किया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिल सके और सभी परीक्षाएं तय समय के भीतर कराई जा सकें।
सीएम साय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे एक निश्चित और संस्थागत ढांचे में आगे बढ़ाना चाहती है। उनका कहना था कि इस विधेयक के जरिए भर्ती प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे और PSC भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब ऐसी स्थिति नहीं होगी, जहां बड़े-बड़े दावे किए जाएं और जमीन पर भर्ती उससे बहुत कम हो।
सरकार की ओर से इस विधेयक को पिछली विसंगतियों को रोकने और नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में जरूरी कदम बताया गया। इससे सदन में राजनीतिक माहौल भी गर्म रहा और बहस के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
सर्वसम्मति से पारित हुआ विधेयक
लंबी चर्चा के बाद कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 को सदन ने मंजूरी दे दी। विधेयक के पारित होने को राज्य की भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे चयन प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित आधार मिलेगा और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं के संचालन में स्पष्टता आएगी। विधेयक पारित होने के बाद सदन में माहौल अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण नजर आया और विभिन्न पक्षों ने एक-दूसरे के सहयोग की सराहना की। इसे सत्र के अंतिम महत्वपूर्ण विधायी फैसलों में से एक माना गया।
सत्र के अंत में जताया गया आभार
विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने से पहले औपचारिक संदेश भी पढ़ा गया। सदन की आसंदी की ओर से सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष दोनों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष ने भी सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद बजट सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह लंबी बहस, राजनीतिक तकरार और विधेयक पारित होने के साथ विधानसभा का सत्र समाप्त हो गया।
