रायपुर: छत्तीसगढ़ में प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ी पिछले नौ वर्षों से उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियां फिलहाल सरकारी फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। नई सरकार के गठन के बाद खिलाड़ियों को उम्मीद जगी थी, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
फाइलों में अटकी सूची, नहीं हुई बैठक
उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन के लिए छह सदस्यीय हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन अब तक इसकी एक भी बैठक नहीं हो पाई है। मंत्रालय में खिलाड़ियों की सूची धूल खा रही है। इससे खिलाड़ियों में निराशा बढ़ती जा रही है।
783 आवेदन, 200 खिलाड़ी पात्र
खेल एवं युवा कल्याण विभाग को वर्ष 2018-19 और 2019-20 में कुल 783 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभागीय जांच के बाद करीब 200 खिलाड़ियों को पुराने नियमों के तहत उत्कृष्ट खिलाड़ी बनने के लिए पात्र पाया गया। इनकी सूची मंत्रालय भेजी गई, लेकिन आगे की प्रक्रिया अब तक अधूरी है।
विधानसभा में उठा मुद्दा
विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा विधायक गोमती साय ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। खेल मंत्री अरुण साव ने जानकारी दी कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच 181 खिलाड़ियों और वर्ष 2018 में एक खिलाड़ी को उत्कृष्ट घोषित किया गया था। वहीं 2018-19 और 2019-20 के खिलाड़ियों की घोषणा अभी प्रक्रियाधीन है। BJP विधायक अजय चंद्राकर, विधायक लता उसेंडी, पुन्नूलाल मोहले और कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने भी इस विषय पर सवाल उठाए।
नौकरी में आरक्षण, लेकिन भर्ती नहीं
प्रदेश के सरकारी विभागों में खिलाड़ियों के लिए दो प्रतिशत पद आरक्षित हैं। इसके बावजूद इन पदों पर भर्ती नहीं हो पा रही है। वर्ष 2018 में खेल कोटे से केवल एक खिलाड़ी को ही नौकरी मिली थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने प्रक्रिया शुरू की, लेकिन चयन अधूरा रह गया।
हाई लेवल कमेटी का गठन
22 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित की गई। इस कमेटी में वन मंत्री केदार कश्यप, खेल मंत्री, सामान्य प्रशासन सचिव, खेल सचिव और खेल संचालक शामिल हैं। गठन के समय खेल मंत्री टंकराम वर्मा ने एक सप्ताह में घोषणा का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
खिलाड़ियों की बदहाल स्थिति
राजधानी रायपुर के कुकुरबेड़ा निवासी साफ्टबाल खिलाड़ी नरेश निर्मलकर, जो नेशनल मेडलिस्ट हैं, आजीविका के लिए चाय बेचने को मजबूर हैं। वे सुबह जिम ट्रेनर और शाम को चाय का ठेला चलाते हैं।
इसी तरह सारंगढ़ के शहीद कौशल और मुख्यमंत्री अवार्ड विजेता सौरभ यादव अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वाहन चला रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने वर्ष 2018-19 में उत्कृष्ट खिलाड़ी के लिए आवेदन किया था और उम्मीद थी कि उन्हें सरकारी नौकरी मिलेगी, लेकिन अब उम्र बढ़ने के साथ उनकी उम्मीदें भी कमजोर पड़ रही हैं।
