CG Family Open Jail: अंबिकापुर जेल की चारदीवारी में सजा काट रहे बंदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में छत्तीसगढ़ में एक नई पहल शुरू की गई है। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को केंद्रीय जेल अंबिकापुर में प्रदेश की पहली परिवार खुली जेल (फैमिली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन-ओसीआई) का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ के डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने किया। यह पहल छत्तीसगढ़ शासन के सेवा संकल्प अभियान के तहत शुरू की गई है।
परिवार के साथ रहेंगे 2 बंदी
इस नई व्यवस्था के तहत फिलहाल 2 बंदियों को अपने परिवार के साथ जेल परिसर में रहने की अनुमति दी गई है। खास बात यह है कि ये बंदी दिन के समय रोजगार या अन्य कार्यों के लिए जेल परिसर से बाहर जा सकेंगे और शाम को लॉकअप से पहले वापस लौटेंगे।
इस पहल का उद्देश्य बंदियों को परिवार से दूर रखकर केवल सजा पूरी कराने के बजाय उन्हें परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने, रोजगार से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत समेत जेल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
पहले महीने का राशन जेल विभाग देगा
फैमिली ओपन जेल में रहने वाले बंदियों और उनके परिवारों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं जेल विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। परिवार को पहले महीने का राशन भी जेल विभाग उपलब्ध कराएगा। इसके बाद बंदी रोजगार के जरिए अपने परिवार के लिए राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था स्वयं करेंगे।
बंदियों को रोजगार से जोड़ने के लिए जेल विभाग की ओर से काम के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ वैकल्पिक रोजगार के साधन भी मुहैया कराने की व्यवस्था की जाएगी।
परिवार और रोजगार से जुड़ने का मिलेगा मौका
अंबिकापुर केंद्रीय जेल की मौजूदा अधोसंरचना का उपयोग करते हुए शुरू की गई यह व्यवस्था बंदियों को परिवार, रोजगार और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने पर केंद्रित है। जेल विभाग की योजना आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार करने की है, ताकि अधिक बंदियों को परिवार के साथ रहते हुए आत्मनिर्भर बनने और बेहतर सामाजिक जीवन की ओर लौटने का अवसर मिल सके।
यह पहल जेल व्यवस्था में सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक नई व्यवस्था के तौर पर शुरू की गई है।
