अगर आपने हाल ही में एसआईआर (SIR) के तहत अपना वोटर वेरिफिकेशन फॉर्म भरा है या भरने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देशभर में चल रही इस प्रक्रिया का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अब ठग खुद को बीएलओ (Booth Level Officer) बताकर कॉल कर रहे हैं और एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए बैंक खाते तक खाली कर रहे हैं। कई राज्यों के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) लोगों को इस नए ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर लगातार सतर्क कर रहे हैं। खास बात यह है कि ठग सिर्फ नए आवेदकों को ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी निशाना बना रहे हैं, जिन्होंने पहले ही एसआईआर फॉर्म जमा कर दिया है।
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स्कैम को कैसे अंजाम दे रहे अपराधी?
- इस धोखाधड़ी में सबसे पहले आपके पास एक कॉल आती है। कॉल करने वाला खुद को आपके क्षेत्र का बीएलओ बताता है और कहता है कि आपका एसआईआर फॉर्म अपडेट या सबमिट करते समय तकनीकी समस्या आ रही है।
- इसके बाद वह भरोसा दिलाते हुए कहता है कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा, जिसे तुरंत बताना होगा। कई बार यह भी कहा जाता है कि OTP नहीं बताया तो आपका फॉर्म स्वीकार नहीं होगा या वोटर लिस्ट से नाम हट सकता है।
- जैसे ही कोई व्यक्ति OTP साझा करता है, साइबर अपराधी उसका इस्तेमाल कर बैंकिंग या अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना लेते हैं और खाते से पैसे निकाल सकते हैं।
सीईओ हरियाणा ने जारी की चेतावनी
हरियाणा के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर वीडियो जारी कर लोगों को इस तरह के साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने की सलाह दी है। वीडियो में बताया गया है कि कई लोग इस तरह की ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसी वजह से लोगों को जागरूक करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
ईसीआई या बीएलओ कभी OTP नहीं मांगते
चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) या कोई भी बीएलओ एसआईआर प्रक्रिया, फॉर्म अपडेट, सबमिशन या वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के लिए कभी भी लोगों को कॉल करके OTP नहीं मांगते। अगर कोई व्यक्ति खुद को बीएलओ बताकर OTP मांगता है, तो समझ लें कि यह फर्जी कॉल है।
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ऐसी कॉल आए तो क्या करें?
- किसी भी स्थिति में OTP साझा न करें।
- कॉल करने वाले की बातों में आकर घबराएं नहीं।
- अगर कोई वोटर लिस्ट से नाम हटाने की धमकी दे, तब भी OTP न बताएं।
- संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें।
- संबंधित नंबर की शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान थोड़ी-सी सतर्कता आपको बड़ी आर्थिक ठगी से बचा सकती है। याद रखें, OTP सिर्फ आपके लिए होता है, इसे किसी के साथ साझा करना भारी पड़ सकता है।
