दुर्ग जिले में साइबर ठगी, सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुए म्यूल अकाउंट्स पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। बीते 48 घंटे में जिले के 8 थानों में 889 बैंक खाताधारकों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक जिले में अब तक 2567 से ज्यादा संदिग्ध किराए के बैंक खातों की पहचान हुई है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम खपाने में किया गया। बुधवार रात 476 और गुरुवार रात 413 खाताधारकों पर केस दर्ज किए गए।
ये खाते बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज, बंधन बैंक, आईडीएफसी, कोटक महिंद्रा, कैनरा, आईडीबीआई और एसबीआई समेत 8 बैंकों में खोले गए थे। सबसे ज्यादा केस सुपेला, छावनी और पुरानी भिलाई थानों में दर्ज हुए।
728 खातों की जांच अभी लंबित: अप्रैल में जिले के 18 थानों को 753 संदिग्ध खातों की सूची जांच के लिए दी गई थी। इनमें अब तक सिर्फ 25 खातों का सत्यापन हो पाया है, जबकि 728 खातों की जांच जारी है। कई खाताधारक पते पर नहीं मिले और कुछ ने मोबाइल नंबर तक बदल दिए हैं।
इसी तरह साइबर रेंज थाने को भी 950 खातों की जांच सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई खाताधारकों से क्राइम ब्रांच पहले ही पूछताछ कर चुकी है, इसलिए अब वे वकीलों के साथ थानों पहुंच रहे हैं।
ऐसे काम करता है म्यूल अकाउंट नेटवर्क: पुलिस जांच में सामने आया है कि ठग किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए करते हैं। दलाल छोटे व्यापारियों, मजदूरों या जरूरतमंद लोगों से 5 से 10 हजार रुपए महीने में बैंक खाते किराए पर लेते हैं।
खाताधारक अपने दस्तावेज और बैंक डिटेल सौंप देते हैं, जिसके बाद मोबाइल नंबर बदलकर खाते ठगों के नेटवर्क में इस्तेमाल किए जाते हैं। ठगी की रकम कई खातों में घुमाकर दूसरे राज्यों तक भेजी जाती है और आखिर में बड़े शहरों में एटीएम से नकदी निकाली जाती है। केंद्र सरकार का समन्वय पोर्टल ऐसे संदिग्ध ट्रांजेक्शन ट्रैक कर खातों की सूची पुलिस को भेजता है।
पहले भी हुई कार्रवाई
- मोहन नगर पुलिस ने म्यूल अकाउंट से जुड़े दो मामलों के केस दर्ज किए थे। एक मामले में 111 खाता धारक और दूसरे में 23 के खिलाफ केस दर्ज किया गया। अब तक पुलिस 72 लोगों को जेल भेज चुकी है। जानकारी के मुताबिक अभी पुलिस सिर्फ खाता धारक के साथ उसे भी जेल भेज रही है, जिसने धारक से किराए पर खाता लिया था।
- पद्भनाभपुर पुलिस ने भी 122 खाता धारकों पर केस दर्ज किए थे। 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस म्यूल खातों के लेयर 1 और दो की जांच कर रही है। कई मामलों में ट्रांजेक्शन के लेयर 20 से ज्यादा होती है। छोटी रकम को ठिकाने लगाने के लिए ठग खातों के कम लेयरों का उपयोग करते है।
