रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाक में नक्सवाद अब खात्मे की तरफ बढ़ रहा है। वहीं, सरकार नक्सल प्रभावित जिलों के विकास को लेकर नई प्लानिंग शुरू कर दी है। शुक्रवार को नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए हैं। मुख्य सचिव ने नक्सल प्रभावित जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु योजना तैयार की गई है।
सभी विभागों को समन्वित होकर करना है काम
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका, वहां पहुंचकर हमें सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ अगले तीन साल के लिए कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
स्थानीय संसाधनों पर होगा फोकस
बैठक में स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविकामूलक गतिविधियों के संचालन एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाए। जिला अधिकारियों ने कहा कि बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। इसके साथ ही क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर फोकस करने को कहा गया है। इस मॉडल के अनुसार, कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन एवं बेहतर कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में कहा गया है कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक की अहम बातें
- वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में परिवारों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
- इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है।
- राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य रखा है।
- प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा
आजीविका क्लस्टरों की करें पहचान
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अगले चरण में प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बनेगी। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
