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    आयकर कानून, जीएसटी और महंगाई के मोर्चे पर क्या नया जानिए 1 अप्रैल 2026 से भारत में लागू हो रहे इनकम टैक्स

    News Lead18By News Lead18March 31, 2026
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    भारत में 1 अप्रैल 2026 से आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव हो रहा है। छह दशक पुराने आयकर कानून की विदाई होने वाली है तो ‘आयकर अधिनियम, 2025’ अमल में आने वाला है। वहीं, जीएसटी 2.0 के तहत घोषित एलानों के लागू होने के बाद अब देश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से बदलने की ओर बढ़ रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी के वेतन, बचत, रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा यह तय है। कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का एलान कर रखा है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया के तनाव और नए विनियामक नियमों के कारण एलपीजी, दवाएं और कारें महंगी हो रही हैं।

    ऐसे में नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करने से पहले आम आदमी के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि 31 मार्च की डेडलाइन चूकने का क्या नुकसान है और 1 अप्रैल से उनकी आर्थिक जिंदगी में क्या-क्या बदलने वाला है? आइए सबकुछ आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं।

    31 मार्च 2026 की आधी रात से पहले चार कामों को निपटाना है जरूरी

    वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर आपको पेनल्टी और वित्तीय नुकसान से बचने के लिए ये काम 31 मार्च तक पूरे करने होंगे:

      • टैक्स सेविंग और निवेश: धारा 80C और 80D के तहत टैक्स छूट पाने के लिए पीपीएफ, ईएलएसएस, और जीवन बीमा में निवेश 31 मार्च से पहले कर लें, अन्यथा इसका लाभ चालू वित्त वर्ष में नहीं मिलेगा।
    • खातों को सक्रिय रखना: पीपीएफ, एनपीएस  और सुकन्या समृद्धि योजना को निष्क्रिय होने और पेनल्टी से बचाने के लिए न्यूनतम अनिवार्य राशि जमा करना आवश्यक है।
    • अपडेटेड रिटर्न: वित्तीय वर्ष 2020-21 (आकलन वर्ष 2021-22) के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की आखिरी समय-सीमा 31 मार्च है।
    • विदेशी आय वालों के लिए: एनआरआई  को विदेशी कर क्रेडिट का दावा करने के लिए ‘फॉर्म 67’ इसी दिन तक जमा करना होगा, अन्यथा दोहरे कराधान का सामना करना पड़ सकता है।

    1 अप्रैल से लागू आयकर अधिनियम 2025 से क्या-क्या बदल रहा?

    पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को ‘आयकर अधिनियम 2025’ से बदल दिया गया है। अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ का झंझट खत्म कर इसे सिर्फ ‘टैक्स ईयर 2026-27’ कहा जाएगा।

    • नई टैक्स व्यवस्था: 12 लाख रुपये तक की शुद्ध वार्षिक आय वालों की टैक्स देनदारी शून्य कर दी गई है। इसके साथ ही वेतनभोगियों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा।
    • पुरानी व्यवस्था में भारी छूट: बच्चों की शिक्षा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है। पुणे, बंगलूरू, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी एचआरए के लिए टियर-1 (50% छूट) में शामिल कर लिया गया है।
    • निवेश पर टैक्स: अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मैच्योरिटी के समय कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ा दिया गया है, और कंपनियों के शेयर बायबैक पर शेयरधारकों को टैक्स देना होगा।

    विदेश यात्रा हुई सस्ती:ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस दर को 5% और 20% की दोहरी दर से घटाकर सीधे 2% कर दिया गया है।

    ‘जीएसटी 2.0’: क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा?

    नई जीएसटी व्यवस्था में टैक्स स्लैब को 5%, 18% और 40% तक समेट दिया गया है।

    • राहत: स्वास्थ्य और जीवन बीमा, 33 जीवन रक्षक दवाएं, और अनपैक्ड डेयरी उत्पादों को 0% (टैक्स-फ्री) कर दिया गया है। छोटे कार, एसी, और टीवी अब 28% से घटकर 18% स्लैब में आ गए हैं।
    • महंगा: तंबाकू, लग्जरी वाहन, बड़ी एसयूवी और ऑनलाइन गेमिंग पर अब सबसे अधिक 40% जीएसटी लगेगा।

    महंगाई का झटका: रसोई से लेकर सड़क तक बढ़ेगा खर्च

    • एलपीजी सिलेंडर: पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान-इस्राइल) तनाव के कारण दिल्ली में घरेलू गैस की कीमत ₹853 से बढ़कर ₹913 हो गई है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर ₹115 महंगा होकर ₹1,883 पर पहुंच गया है, जिससे बाहर खाना-पीना महंगा होगा।
    • दवाएं: फार्मा कंपनियों की बढ़ती लागत के कारण एनपीपीए ने 900 से अधिक आवश्यक दवाओं (जैसे पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स) की कीमतों में 1.74% तक की वृद्धि को मंजूरी दी है।
    • कारों की कीमत में उछाल: आगामी ‘बीएस-7’ (BS-7) उत्सर्जन मानकों की तैयारी और बढ़ती लागत के कारण टाटा मोटर्स, होंडा (25,000-65,000 रुपये तक) और मर्सिडीज जैसी कंपनियों ने 1 अप्रैल से गाड़ियों के दाम बढ़ा दिए हैं।

    बैंकिंग, पेंशन और बीमा के नए नियम

    • एटीएम और बैंक खाते: एचडीएफसी बैंक अब यूपीआई आधारित कार्डलेस निकासी को भी पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन में गिनेगा। लिमिट पार करने पर ₹23 चार्ज लगेगा। न्यूनतम बैलेंस न रखने पर बैंक अब मनमाना जुर्माना नहीं लगा सकेंगे, बल्कि यह शॉर्टफॉल (कमी) के अनुपात में होगा।
    • क्रेडिट कार्ड और पैन: नए पैन कार्ड के लिए अब सिर्फ आधार काफी नहीं होगा, 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। सभी डिजिटल पेमेंट के लिए सिर्फ ओटीपी नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक जैसे 2FA (डायनामिक फैक्टर) अनिवार्य कर दिए गए हैं।
    • एनपीएस निकासी: रिटायरमेंट पर अब 60% के बजाय 80% तक राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। आठ लाख रुपये या उससे कम का कॉर्पस होने पर 100% एकमुश्त निकासी संभव है।
    • हेल्थ इंश्योरेंस: बीमा कंपनियों के लिए ‘अधिस्थगन अवधि’ (मोरेटोरियम अवधि) घटाकर पांच वर्ष कर दी गई है। पांच साल प्रीमियम भरने के बाद कंपनी किसी पुरानी बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेगी।

    ट्रेन और यात्रा से जुड़े किन नियमों में बदलाव?

    हाइवे पर यात्रा के लिए फास्टैग का एनुअल पास 3,000 से बढ़कर 3,075 रुपये हो गया है। वहीं, भारतीय रेलवे के नए नियम के अनुसार, ट्रेन प्रस्थान से आठ घंटे के भीतर कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर अब कोई रिफंड नहीं मिलेगा (पहले यह अवधि चार घंटे थी)।

    बदलावों का क्या मतलब?

    1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे ये नियम बताते हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने की ओर बढ़ रही है। एक तरफ जहां मिडिल क्लास को 12 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री आय और सस्ती स्वास्थ्य बीमा का तोहफा मिला है, वहीं भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण गैस, दवाएं और कारें महंगी होने से घरेलू बजट पर दबाव भी बढ़ने वाला है। ऐसे में स्मार्ट और अनुशासित वित्तीय नियोजन ही समय की सबसे बड़ी मांग है।

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