रायपुर: प्रदेश की राजनीति को झकझोर देने वाले बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। हाईकोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए अहम फैसला सुनाया है। इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल तेज हो गई है। जहां अमित जोगी ने इस फैसले को अन्याय बताया है, वहीं पीड़ित परिवार ने इसे वर्षों के संघर्ष का परिणाम माना है।
2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
ज्ञात हो कि एनसीपी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की हत्या ने उस समय की अजीत जोगी सरकार को हिला दिया था। यह घटना 4 जून 2003 की रात करीब 11 बजे की है, जब जग्गी अपनी कार से घर लौट रहे थे। मौदहापारा थाने के सामने अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। गंभीर रूप से घायल जग्गी को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जांच और ट्रायल की लंबी प्रक्रिया
इस हत्याकांड को राजनीतिक साजिश मानते हुए जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने लगातार न्याय की मांग की। दिसंबर 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार को भी इस घटना से जोड़कर देखा गया। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसमें तत्कालीन थाना प्रभारी सहित कई पुलिस अधिकारियों पर साक्ष्य मिटाने के आरोप सही पाए गए।
वर्ष 2007 में विशेष अदालत ने इस मामले में 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें तीन पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, उस समय साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
दोषियों की सूची
ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों में पूर्व मेयर एजाज ढेबर, याहया ढेबर, सूर्यकांत तिवारी, शूटर चिमन सिंह सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। इसके अलावा तत्कालीन थाना प्रभारी वीके पांडेय, सीएसपी राकेश चंद्र त्रिवेदी, अमरीक सिंह गिल, फिरोज सिद्दीकी, अवनीश सिंह लल्लन, अभय गोयल, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, विक्रम शर्मा (मृत), जबवंत और विश्वनाथ राजभर शामिल हैं। दो आरोपी विक्रम शर्मा उर्फ बल्टू पाठक (मृत) और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पार्टी भी निष्पक्ष जांच चाहती थी, इसलिए यूपीए सरकार के दौरान अमित जोगी की गिरफ्तारी हुई थी। वहीं भाजपा के प्रवक्ता दाऊ अनुराग अग्रवाल ने कांग्रेस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
