अमेरिका ने भारतीय जहाज पर कुछ ही दिनों के अंतराल पर तीसरा हमला किया है। ओमान के बंदरगाह के पास भारतीय क्रू वाले मर्चेंट जहाज़ को अमेरिका ने निशाना बनाया है। FSUI के अनुसार, गुरुवार को ओमान के तट पर भारत से जुड़े एक और जहाज़, MT Jalveer पर हमला हुआ। बताया जा रहा है कि इस जहाज़ पर 20 से ज़्यादा नाविक सवार थे।
ओमान में भारतीय दूतावास ने भी कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी है और वे स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दूतावास ने एक बयान में कहा, “हमें आज ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज़ से जुड़ी घटना के बारे में पता चला है। हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और आगे की जानकारी के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।”
please confirm 20 Indian Seafarers on board and if vessel is M.T. Jalveer ? @Indemb_Muscat https://t.co/s8eAIh8G06 pic.twitter.com/9WnCnuku8P
— FSUI (@FSUIINDIA) June 11, 2026
कब कब भारतीय जहाज पर अमेरिका ने किया हमला?
- कई रिपोर्टों में इस जहाज़ की पहचान MT जलवीर के तौर पर की गई है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर घटना की प्रकृति, नुकसान की सीमा या किसी के हताहत होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। पिछले तीन दिनों में ओमान के पास जहाज़ से जुड़ी यह तीसरी घटना है।
- पहली घटना 8 जून को MT मैरिवेक्स के साथ हुई थी, जब समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार एक संदिग्ध हमले के बाद टैंकर में आग लग गई थी। जहाज़ पर मौजूद सभी 24 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए थे।
- दूसरी घटना 10 जून को हुई, जब ओमान की खाड़ी में टैंकर MT सेटेबेलो पर हमला हुआ। इस जहाज़ पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार, 21 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन शुरू में लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की बाद में मौत की पुष्टि हुई।
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भारत ने हमले की निंदा की, अमेरिका ने क्या कहा?
सेटेबेलो पर हुए हमले पर नई दिल्ली ने कड़ी राजनयिक प्रतिक्रिया दी। भारत ने देश में मौजूद सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया और हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा की और जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। बाद में अमेरिका ने कहा कि उसके सैनिकों ने टैंकर पर “सटीक” हमला किया, क्योंकि कथित तौर पर उसने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि यह कार्रवाई ईरानी तेल शिपमेंट को निशाना बनाने वाले उसके चल रहे समुद्री अभियानों का हिस्सा थी।
