US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से सभी देशों में खुशी की लहर है। सभी बड़े देशों के नेताओं ने इस समझौते का स्वागत किया और इसे बड़ी राजनयिक सफलता बताया। इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलेगा और पश्चिमी एशिया में आर्थिक दबाव कम होगा। इस युद्ध को 100 दिन से ज्यादा हो चुके थे और सीजफायर होने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद रहने से पश्चिमी एशिया के सभी देशों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था। इस समझौते की कतर, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और फ्रांस ने सराहना की। सभी देशों के नेताओं ने सभी पक्षों से समझौते को पूरी तरह से लागू करने और बातचीत के माध्यम से स्थायी शांति की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
कतर ने किया समझौते का स्वागत
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने समझौते का स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हम संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं,” और साथ ही यह भी कहा कि कतर भविष्य में होने वाली वार्ताओं को “सकारात्मक और रचनात्मक भावना” के साथ संचालित करने की उम्मीद करता है। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी शांति को मजबूत करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तुर्की के राष्ट्रपति ने की सराहना
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने भी इस घटनाक्रम की सराहना की कहा कि यह उनके क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। एर्दोगन ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि यह खबर, जिसका पूरी दुनिया को लंबे समय से इंतजार था, हमारे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का स्थायी वातावरण स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।” उन्होंने उकसावों के प्रति आगाह भी किया और राजनयिक प्रयासों में सहयोग के लिए कतर और सऊदी अरब को धन्यवाद दिया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी बधाई दी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस समझौते को युद्ध समाप्त करने, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया। स्टारमर ने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रम्प और पाकिस्तान, कतर और अन्य देशों के उन मध्यस्थों को बधाई देता हूं, जिन्होंने इस सफलता में योगदान दिया है।” उन्होंने ज्ञापन के पूर्ण कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करना चाहिए। स्टारमर ने आगे कहा कि यूनाइटेड किंगडम अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के समन्वय से तकनीकी वार्ता और समुद्री सुरक्षा प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है। समुद्री सुरक्षा प्रयासों में बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियान भी शामिल हैं।
जर्मन चांसलर ने स्वागत किया
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी समझौते का स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण वैश्विक निहितार्थों वाली एक राजनयिक उपलब्धि बताया। उन्होंने लिखा, “मैं अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करता हूं और इस राजनयिक सफलता के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी पक्ष को बधाई देता हूं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित बनाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।”
फ्रांस के राष्ट्रपति बोले- समझौता जल्दी लागू करें
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने समझौते को शीघ्रता से लागू करने का आह्वान किया और बिना किसी प्रतिबंध के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के महत्व पर जोर दिया। मैक्रॉन ने कहा, “इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल और बिना शर्त फिर से खोलने में मदद मिलनी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम समुद्री यातायात को बहाल करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। मैक्रोन ने कहा कि इस समझौते से ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए व्यापक वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।
19 जून को होंगे साइन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो चुका है। इस पर 19 जून को स्विटजरलैंड में साइन होंगे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। सभी को बधाई! दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल बहने दो!” हालांकि, ईरान की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
