रायपुर। जब देश में इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है और सामान्य परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों का उपचार किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ में नवा रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल एक मिसाल पेश कर रहा है। यहां न कोई कैश काउंटर है और न किसी प्रकार की फीस ली जाती है।
जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों का अत्याधुनिक सर्जरी सहित पूरा इलाज यहां निश्शुल्क किया जाता है। श्री सत्य साईं ट्रस्ट द्वारा संचालित इस संस्थान ने अब तक 36 हजार से अधिक बच्चों को नई जिंदगी दी है, जबकि दो लाख से ज्यादा मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं।
प्रतिदिन औसतन 10 से अधिक हृदय सर्जरी करने वाला यह अस्पताल न केवल देश के विभिन्न राज्यों बल्कि विदेश से भी आने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद का सबसे भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। यहां इलाज ही नहीं, विश्वास और जीवन सब मुफ्त मिलता है।
बिहार के लखीसराय जिले के खलतू यादव तीन साल तक कर्ज में डूबते गए, फिर भी बेटे विक्रम के दिल का ऑपरेशन नहीं करा सके। हर बीतते दिन के साथ उम्मीदें टूटती चली गईं, लेकिन जब वह श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल पहुंचे तो बिना एक भी रुपया खर्च किए इलाज हुआ और विक्रम को नई जिंदगी मिल गई
वह कहते हैं कि यहां ओपीडी में रजिस्ट्रेशन से लेकर आपरेशन में लगने वाले दवाओं के खर्च तक सब कुछ मुफ्त था, जबकि निजी अस्पताल में इसका खर्च करीब 20 लाख रुपये तक आता।
अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी अजय सर्राफ कहते हैं कि यहां इलाज के साथ रहना और खाना भी मुफ्त है। 12 साल तक के बच्चों के साथ दो व्यक्तियों और 12 से 18 साल तक के मरीज के साथ एक व्यक्ति के रहने और खाने की व्यवस्था की जाती है।
रायपुर के अलावा पलवल (हरियाणा), नवी मुंबई (महाराष्ट्र) और कोंडापक (तेलंगाना) के अस्पताल में भी नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। वह कहते हैं कि नवा रायपुर के अस्पताल में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान आदि के साथ विदेश के कई परिवार अपने बच्चों के इलाज के लिए पहुंचते हैं।
फ्री इलाज से मिली नई जिंदगी
उत्तर के सोनभद्र निवासी प्लंबर दिनेश कुमार चौरसिया महीने में बमुश्किल 10 हजार रुपये कमाते हैं। उनकी चार साल की बेटी अनन्या की बीमारी को वह दो साल तक सर्दी-बुखार समझकर इलाज कराते रहे।
हालत बिगड़ने पर लखनऊ में सही बीमारी का पता चला, लेकिन महंगे ऑपरेशन का खर्च उनके लिए बड़ी बाधा बन गया। गांव के एक व्यक्ति की सलाह पर वह यहां पहुंचे, जहां मुफ्त इलाज हुआ और अब उनकी बच्ची तेजी से स्वस्थ हो रही है।
चार साल का बेटा अब स्वस्थ
रांची की बेनेडिकता बकला चार वर्षीय बेटे आहान टोप्पो के इलाज के लिए कोलकाता से लेकर दक्षिण भारत तक भटकती रहीं। बेटे की बीमारी का पता उन्हें एक साल का होने पर चला था।
छोटी दुकान और किराये से करीब 12 हजार रुपये मासिक आय के कारण इलाज करना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था। कर्ज भी नहीं मिला। अंततः जानकारी मिलने पर वह यहां पहुंचीं, जहां बेटे का निश्शुल्क इलाज हुआ और अब आहान पूरी तरह स्वस्थ है।
हेल्पलाइन नंबर 8010119000 पर करें संपर्क
अस्पताल के चेयरमैन डा. सी. श्रीनिवास के अनुसार स्वास्थ्य सेवा केवल उद्योग नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है और इसी सोच के साथ यह संस्थान निरंतर कार्य कर रहा है।
इलाज के लिए सोमवार से शनिवार तक सुबह नौ से पांच बजे तक हेल्पलाइन नंबर 8010119000 पर संपर्क किया जा सकता है। अस्पताल की वेबसाइट srisathyasaisanjeevani.org/contact-us से पूरी जानकारी मिल सकती है।
